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Ultrasound कराने से पहले और बाद में इन बातों का रखें धà¥à¤¯à¤¾à¤¨
पेट के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ का अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड कराने से पहले जरूर जान लें ये बातें
किडनी डिजीज या पेट से जà¥à¥œà¤¾ कोई लकà¥à¤·à¤£ दिखने पर डॉकà¥à¤Ÿà¤° आपको पेट के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ का अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड कराने की सलाह देता है। अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड में अंगों और उनकी साउंड वेवà¥à¤¸ को सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ रूप से देखा जा सकता है। पेट के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ में लीवर, किडनी, पितà¥à¤¤à¤¾à¤¶à¤¯ की थैली और पाचक गà¥à¤°à¤‚थि होते हैं। अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड से पेट दरà¥à¤¦, किडनी रोग, किडनी की पथरी जैसी विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ बीमारियों के इलाज में मदद मिलती है। मà¥à¤‚बई सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ बालाà¤à¤¾à¤ˆ नानावती हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² में कंसलà¥à¤Ÿà¥‡à¤‚ट रेडियोलाजिसà¥à¤Ÿ डॉकà¥à¤Ÿà¤° रशà¥à¤®à¤¿ पारिख आपको बता रही हैं कि पेट के ऊपरी हिसà¥à¤¸à¥‡ का अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड कराने से पहले या बाद में आपको किन-किन बातों का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ रखना चाहिà¤à¥¤
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड से पहले कà¥à¤¯à¤¾-कà¥à¤¯à¤¾ सावधानी बरतनी चाहिà¤?
आमतौर पर मरीज को इलाज से पहले आठसे दस घंटे तक कà¥à¤› नहीं खाने की सलाह दी जाती है और कà¥à¤› मामलों में चार से छह घंटे तक। कई रोगियों को फैट-फà¥à¤°à¥€ मील खाने को à¤à¥€ कहा जाता है। किडनी के लिठअलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड कराने से पहले चार से छह गिलास पानी पीने को कहा जाता है। इसके अलावा ढीले कपड़े पहनना बेहतर होता है।
यह कैसे काम करता है?
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड सोनार इमेजिंग के सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त पर आधारित है। इसमें टà¥à¤°à¤¾à¤‚सडà¥à¤¯à¥‚सर दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ कैपà¥à¤šà¤°à¥à¤¡ साउंड वेवà¥à¤¸ à¤à¤• ऑबà¥à¤œà¥‡à¤•à¥à¤Ÿ के जरिठपास होती हैं और टकराकर वापस आती हैं। à¤à¤• सà¥à¤•à¥à¤°à¥€à¤¨ होता है जिस पर सà¥à¤•ैन इमेज आती हैं। टà¥à¤°à¤¾à¤‚सडà¥à¤¯à¥‚सर à¤à¤• माइकà¥à¤°à¥‹à¤«à¥‹à¤¨ की तरह दिखता है जो जांच के दौरान साउंड वेवà¥à¤¸ को ऑरà¥à¤—न तक à¤à¥‡à¤œà¤¤à¤¾ है और डिसà¥à¤ªà¥à¤²à¥‡ इमेज के लिठगूंज (echoes) को कैपà¥à¤šà¤° करता है।
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड कैसे किया जाता है?
मरीज को टेबल पर लेटाया जाता है। इस टेबल को à¤à¥à¤•ाया à¤à¥€ जा सकता है। इसके बाद रेडियोलॉजिसà¥à¤Ÿ सà¥à¤•िन पर जेल लगाकर जांच शà¥à¤°à¥‚ करता है। जेल इसलिठलगाया जाता ताकि सà¥à¤•िन और टà¥à¤°à¤¾à¤‚सडà¥à¤¯à¥‚सर के बीच हवा को नषà¥à¤Ÿ किया जा सके और इनके बीच उचित संपरà¥à¤• बनाया जा सके। टà¥à¤°à¤¾à¤‚सडà¥à¤¯à¥‚सर को वांछित छवियों के कैपà¥à¤šà¤° करने तक हिलाया जाता है। जांच होने पर जेल को साफ कर दिया जाता है।
कà¥à¤¯à¤¾ जेल हानिकारक होता है?
जेल का इसà¥à¤¤à¥‡à¤®à¤¾à¤² अंगों की बेहतर छवियों के लिठकेवल सà¥à¤•िन और टà¥à¤°à¤¾à¤‚सडà¥à¤¯à¥‚सर के बीच संपरà¥à¤• में सà¥à¤§à¤¾à¤° के लिठकिया जाता है। यह नॉन-टॉकà¥à¤¸à¤¿à¤• है और सà¥à¤•िन के लिठसेफ है।
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड के दौरान दरà¥à¤¦ होता है कà¥à¤¯à¤¾?
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड के दौरान किसी तरह का दरà¥à¤¦ नहीं होता है। कई मामलों में मरीजों के लिठअसहज हो सकता है लेकिन इससे दरà¥à¤¦ नहीं होता है। हालांकि कई बार मरीज को कà¥à¤› देर तक सांस रोकने के लिठकहा जा सकता है।
इसमें कितना समय लगता है?
यह टेसà¥à¤Ÿ आधे घंटे में पूरा हो जाता है। कई बार दूसरा टेसà¥à¤Ÿ करने से पहले आपको थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। जांच के दौरान बेहतर चितà¥à¤° पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ करने के लिठआपको थोड़ा इधर-उधर होने के लिठकहा जा सकता है।
अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड की रिपोरà¥à¤Ÿ कब मिलती है?
इसकी रिपोरà¥à¤Ÿ आपको उसी दिन मिल जाती है। यानि अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड के दस या बीस मिनट बाद रिपोरà¥à¤Ÿ मिल जाती है।
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